अध्याय 198 मेरा पैर फिसल गया

"जिस पल हम दोबारा मिले थे, उसी पल से मैं आज के दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ।"

"तुम्हें लेकर, सच कहूँ तो, मुझमें कभी ज़्यादा सब्र रहा ही नहीं।"

जेम्स की नज़र शार्लट पर टिकी रही—गहरी, और पढ़ी न जा सकने वाली।

शार्लट ने नहीं सोचा था कि छह साल बाद जेम्स इतना सीधा बोल देगा—मानो अपने दिल की बात लगभग कबूल ह...

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